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शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

अब आपका ये ब्लॉग www.newslkr.com पर भी उपलब्ध


प्रिय पाठकों आपके असीम प्यार ने हमें एक नई उर्जा दी है ,,,,,,आप जितनी बड़ी संख्या में  इस ब्लॉग पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवाए हैं, उसके बजह से हमने इस ब्लॉग को वेबसाइट में बदल दिया है ....अब आप अपने इस पसंदीदा ब्लॉग को www.newslkr.com पर  भी पढ़ सकते हैं ................ये हमारे लिए पहले ही कदम पर बड़ी सफलता है ....................उम्मीद है आपका प्यार हमें मिलता रहेगा................. 

शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2012

टन टन टन की जीत से काहे परेशां हैं उलाला चाचा .......

बात दियारा इलाके की है ...सुर्जिचक के उस पार एक गावं है भगवन राम के नाम पर .....अजी गावं क्या नगर है ...नगर ....गावं में ही बाज़ार है,अस्पताल है और  तो और बच्चा पार्टी के पढने लिखने के लिए प्रायमरी स्कूल से लेकर हाई स्कूल तक है....एक कमी था पुल का तो वो भी सुपर सी एम् बनवा ही दिए  ....अब तो विद्यापीठ से नीचे उतरिये ...गाडी या मोटरसाइकिल में टॉप गियर लगाके गावं पहुँच जाइये .....दियारा में आज़ादी के बाद सबसे बड़का मुद्दा चुनाव में इ पुल ही होता था......पुल बनवाने के नाम पर नेता जी लोग यंहा के सीधे साधे और मीठी बोली बाले  दिरवारी मतदाता भाई  लोगों का वोट ले लेते थे....वोट का बात चला है तो सुनिए ......दियारा इलाके में बहुत जायदा संख्या में नेता जी कभी नहीं हुए.....गिन चुन कर  ऊँगली पर आप नाम जोड़ सकते है ....एक दसक में बहुत से बहुत एक दर्जन ......वो भी सत्ता पक्ष और विपक्ष मिला कर ..........इसी पावन धरती से जुड़े रहे उलाला चाचा जी ......जे पी आन्दोलन से तो हमको पता है लेकिन हो सकता है की वो उससे भी सीनयर इण्डिया नेता जी हो.... मृदु स्वाभाव के उलाला चाचा जी कभी किसी का नुकसान किये हो ऐसा मुझे नहीं पता है .....लेकिन कानाफूसी का क्या कीजयेगा लोग तो करता ही है ....वैसे  तो चाचा जी पर घूसखोरी या पैसा लेने का आरोप कभी नहीं लगा है ....लेकिन चचा के बारे में लोग कहता है की ...थाना पुलिस वाला मामला में पैरवी पैगाम करते थे.....सच क्या है भगवन मालिक ....लेकिन इतना तय है की चाचा जी खुद के लिए कभी किसी से कुछ नहीं लिए है ..हां जिले की राजनीती में अपने जेब से ही  पैसा खर्च कर हस्ती जरुर बने रहे ......यही बजह है की जब दियारा वाले पूर्व बिधायक जी से उलाला चाचा के बारे में पूछियेगा तो वो कहेंगे की....."इ जे पांच गो  छै सुपर सी एम् के साथे  इ हे  ओकर जहाज डूबा देते .....उलाला के तो हम जानय छिय ...वोट छै एक को गो नै लेकिन कुर्त्ता झार के नेता बनल छै "...हलाकि विधायक जी का ये दर्द इसलिए भी है किउन की उलाला चचा    पहले उन के साथ थे ...लेकिन बदलते वक़्त के साथ सुपर सी एम् के साथ हो लिए ......नितीश सरकार में सुपर सी एम् की चलती जो भी भाई लोग देखा है उसको पता होगा की कैसे बीच बाज़ार से एक सौ गाड़ी का काफिला सांय सायं करके भागता था ...काफिला ऐसा की अगर आप लखीसराय बाज़ार में सड़क किनारे खरे है तो धुरी और गर्दा से मिर्ची वाला जलन आँख में होना शुरू हो जाता था ...खांसी और छींक तो पूछिये ही मत  ....पलन बाबु के  धकापेल चलती में उलाला चाचा अपने लिए तो कुछ नहीं बना पाए लेकिन साथ रहने बाले का खूब भला किया ......  बंधू  समय बदला पलन बाबु की चलती ख़तम हुई ......उलाला चाचा अब जाएँ तो जाएँ कंहा दरबार ख़तम ......इसी बीच पंचायत चुनाव में एक करिश्मा हुआ....पलन बाबू के समर्थक सब दियारा में हार गया और जितने वालों में एक ऐसा सख्स शुमार हो गया जिसके बारे में ...उलाला चाचा सपनो में नहीं सोचते थे ...और उसके जीत के साथ ही उलाला चाचा की परेशानी बढ़ने लगी .....हुआ ये की उलाला चाचा का अपना भतीजा टन टन टन पंचायत समिति बन गया ....वो भी उलाला चाचा के चेला को धरती पकड़ा कर .....कुछ दिन तक तो उलाला चाचा को विश्वास ही नहीं होता था की टन टन टन जीत गया है ......जब लोग सब उनको  चुटी काट कर भरोसा दिलाता था तब जाकर वो मानते थे .....खैर टन टन टन वंही नहीं रुका मेहनत और जुगाड़ के बदौलत बन गया दियारा का प्रमुख .....अरे बाप्पा इ का हो गया ....टन टन टन निर्विरोध प्रमुख बन गया ...इ खबर सुनके उलाला चाचा को आँखों के सामने अँधेरा छाता दिखा ......आप सोच रहे होंगे की भतीजा आगे बढ़ा तो चाचा को क्या दिक्कत हो सकता है भला .....तो सुनिए बंधू ....गावं में एक कहावत है " गोतिया और सतूआ महीन करने वाले का नाम होता है " यंहा तो गोतिया टन टन टन निर्विरोध जीत गया .....जीत के बाद टन टन टन पलन बाबु के साथ हो लिए ....अब मुश्किल ये हो गया है की कल तक पलन बाबु के दरवाजे पर खड़ा रहने वाला टन टन टन ...को साहेब ...प्रमुख साहेब अंदर आइये कह कर बुलाते है और उलाला चाचा को बहार रहना पड़ता है ....तो भैया टन टन टन के इस कहानी से आने वाले दिनों में वप लोग सतर्क हो जाएँ  और अपने गोतिया को पैर की धूलि न समझे ...वरना उलाला चाचा की तरह आप को भी गाना पड़ेगा ....मुझे लोग कहते हैं क़दमों की धूल...अगर आप छुन लें ...अगर आप छूं ले तो बन जाऊं  फूल....................   
प्रिये पाठकों इस ब्लॉग पर अब तक आप लखीसराय के पत्रकारिता जगत की ही अधिकांश चटपटी खबरे पढ़ रहे थे ...लेकिन अब थोडा ट्रैक चेंज करते हुए ...पत्रकार टाइप चीज से आगे बढ़ते हुए ...राजनीती का रुख करते है ...ऐसा इस लिए भी करना पड़ रहा है की ....कुछ पाठक बंधू लोगों ने पत्रकारिता जगत पर लिखे गए चटपटी ख़बरों को गुटबाजी का नतीजा समझा  है ...हलाकि ब्लॉगर की कोई मंशा ऐसी नहीं है की किसी भी ...खबरची भाई के चरित्र या फिर उनके व्यकतित्व को चोट पहुँचाया जाये ....इस ब्लॉग को शुरू करने  का एक मात्र मकसद है ..मसखरी के साथ लखीसराय की हर खबर से आप को  उपडेट करना ...शुरुआत में तो लगा था की वर्षों की तपस्या के बाद इस ब्लॉग को हिट करवाना संभव होगा ...लेकिन   सात दिनों में ही जिस तरह से लगातार इस ब्लॉग पर पाठकों की संख्या बढ़ रही है ...हम ने जिले में आ रहे कई अख़बारों के प्रसार संख्या को पीछे छोर दिया है .....आज,नवबिहार,सन्मार्ग,राष्ट्रीय सहारा,और प्रभात खबर , अब अपुन के इस ब्लॉग से पीछे है .....अगला निशाना हिंदुस्तान और दैनिक जागरण है ....अगर आप का प्यार ऐसे ही मिलते रहा तो यकीं मानिये इस महीने के अंत तक मसखरी का ये प्लेटफोर्म .....अखबार टाइप जिस से ज्यादा पाठक वर्ग बना लेगा ......

गुरुवार, 16 फ़रवरी 2012


इस ब्लॉग पर आने वाले पाठकों से अनुरोध है की वो अगर  लखीसराय जिले की अखबारी भाषा वालें ताजे  ख़बरों का मजा लेना चाहते है....तो  कृपया साइड बार मैं दिए गए "लखीसराय समाचार " पेज पर जाएँ....ब्लॉगर का दाबा है की शर्तिया तौर पर आप सबसे पहले लखीसराय जिले की ख़बरें इस पेज पर पाएंगे ...............

बीमार पत्रकार से बीबी बोली.............

चुटकुला

बीमार पत्रकार से बीबी बोली
बीबी :इस बार कोई जानवरों के डॉक्टर को दिखाओ तभी आप ठीक होगे .
पत्रकार :काहे जी ......?
बीबी :रोज सुबह मुर्गे की तरह जल्दी उठ जाते हो, घोड़े की तरह भाग कर प्रेस जाते हो, गधे की तरह दिन भर कम करते हो, लोमड़ी की तरह इधर -उधर से खबर लाकर रिपोर्ट बनाते हो, बन्दर की तरह बॉस के इशारे पर नाचते हो,घर आकर परिवार पर कुत्ते की तरह चिलाते हो,और फिर भैंसे की तरह सो जाते हो .......इंसानों का डॉक्टर क्या तुम्हे खाक ठीक करेगा .......................

लखीसराय में शराब ने चौथा खम्भा के नस्ल को बर्बाद कर दिया है .....पार्ट -2


आगे ........
मैं ऐसा इस लिए कह रहा हूँ की आप अगर आजीविका के लिए कोई नौकरी या फिर रोजगार करते है तो इस आर्थिक युग में जब बंधू पैसा ही सब कुछ बोलता है....आप ज्यादा से ज्यादा माल मिलने वाले पेशे में जायेंगे ....माल पानी जेब में होगा तो घर में भी शांति और बहार भी शांति .....पैसे कमाने की ललक हर किसी को होती और कम से कम लखीसराय में तो है ही ....अगर नहीं होती तो जरा गौर करिए.....पुरानी बाज़ार थाना चौक के समीप एक शोरूम हुआ करता था ....टीपिएस बजाज का इसके मालिक बाबु टीपि सिंह का एक गांजे का गैंग था ....इस गैंग में शामिल हुआ करता था शल्लू...शायद ही कोई युवक शल्लू को नहीं जानता हो .....दिन भर में 30 से 35 चिलम गांजा पीने के बाद  अगर दारु या बियर मिल जाये तो वो, भी हलक के नीचे. शल्लू को जानने वाला हर इंसान सोचता यही होगा की इस युवक की ज़िन्दगी नशे के गिरफ्त में ही रह जाएगी ....लेकिन पैसे कमाने की ललक ने  उसे दिल्ली खिंच लाइ ....और आज वो नशेरी ...एक शिक्षक है और बंच्चों को पढ़ा कर अपना और अपने घरवाली की  ज़िन्दगी ठाठ से चला रहा है .....तो कहने का ये मतलब है की पैसे के लिए सब कुछ करता है इन्सान ......अब जरा चाँदी पर बल दीजिये ...और सोचिये की अगर कोई शौक से बिना पैसा वाला काम चुने और वो भी शौकिया नहीं वल्कि परिवार चलाने के लिए तो भला कैसे परिवार चलेगा.....दैनिक जागरण अख़बार के ब्यूरो प्रमुख के अलावा लखीसराय में तनख्वाह वाला खबरची भाई कोई नहीं है.......सब लोगों को मानदेय मिलता है.....मानदेय की राशी इतनी है की भाई लोग और महीने भर पेट्रोल अगर बाईक में डलवा लें .....तो दाढ़ी बनाने के पैसे के अलावा ...पान और सिगरेट का भी  पैसा न बच्चे ....घर खर्च तो छोर ही दीजिये ....एक बात और साफ़ कर दें ....की बाबा बिसेस्वर यानी प्रिंसपल साहेब ही एक मात्र ऐसे पत्रकार थे ...जो जमींदार या फिर ऐसे परिवार से थे जिनको पत्रकारिता के पैसे की रोटी नहीं चाहिए थी.......आज के दौर में जिले में कोई भी कलमची ..52 बीघा पुदीना वाले परिवार से नहीं है......हर एक को खुद ही रोजी रोटी चलाने की जिम्मेदारी है ...फिर भी बिना पैसे या ऊंट के मुह में जीरा जैसे मानदेय पर ...जोर शोर से चौथा खम्भा का झंडाबरदार बना हुआ है.......बंधू आप के मन में सवाल उठ रहा होगा की किसी का घर कैसे चलता है ये उसका निजी मामला है हमें क्या .....लेकिन आप भूल कर रहे है ....पत्रकारों की भूमिका समाज में वाच डॉग वाली है ...और अगर डॉग भूखा हो तो आप ......समझ लीजिये वो किसी को भी अपना शिकार बना सकता है .....और ये लोकतंत्र के लिए पाकिस्तानियों से ज्यादा खतरनाक है....खैर आगे बढ़ते है ....और आप को ये बता देते है की भुखमरी वाली स्थिति के बाबजूद लोग पत्रकार किउन बनाना चाहते है .......देखिये छोटे से इलाके  में आप जैसे ही पत्रकार बनते है "आप आम से खास हो जाते है "....थाना पुलिस...डीएम् ...एस पी, अधिकारी से लेकर नेता मंत्री तक आपके नाम के पीछे "जी " लगा कर संबोधित करता है.....बस यही वो आम से खास वाला चीज है जो आप को गर्त में ले जाता है .....पत्रकार साहब घर से निकले ...किसी चौक चौराहे पर खड़ा हुए....तुरंत उनसे लोग पूछ लेता है ....पत्रकार साहब ...पान चाय सिगरेट ...कुछ चलेगा क्या .......?
जारी है............

बुधवार, 15 फ़रवरी 2012

लखीसराय में शराब ने चौथा खम्भा के नस्ल को ही बर्बाद कर दिया है.... पार्ट -1

शराब,शबाब और कबाब ........ये तीनो अगर एक साथ किसी इंसान को  मय्यसर हो तो फिर बीसों ऊँगली घी में और मूरी कराही में वाली स्थिति हो जाती है .....और उस पर भी अगर ये सुख गुप्त रूप से मिले तो फिर सोने पर सुहागा..... मजा भी ले रहे है और किसी को खबर भी नहीं ....मौजा ही मौजा  .......लेकिन अगर आपके जीवन में बंधू ये तीन चीजें  हर रोज मिले तो फिर समझ लीजिये ....की कुदरत आपके साथ जल्द ही आपके कुकर्मों का न्याय करने वाली  है .....अपुन ये ज्ञान ऐसे ही नहीं बाट रहे ....अनुभव के आधार पर एक एक बियर का बाजी अगर आप चाहें तो मैं लगा सकता हूँ.....सुनिए  हम ये इस लिए कह रहे हैं ....किउंकि लखीसराय में शराब ने चौथा खम्भा  के नस्ल को ही बर्बाद कर दिया है ....ये हाल तब है जब एक साथ शराब, शबाब और कबाब, सोसाईटी के वाच डॉग भाई लोगों को उपलब्ध नहीं है....किसी को इनमें से दो मिला है तो किसी को इनमें से एक ...लेकिन लड़खड़ा सब रहा है ......इके दुक्के खबरची भाई इस सुख को अब तक आत्म सात नहीं कर पाए है ...इसलिए वो खड़े है ...शराब और कबाब पर आज बात कर लेते है शबाब वाला चेप्टर पर फिर कभी .....मैं पहले ही साफ़ कर देता हूँ की ये मेरा अनुभव है... हो सकता है की जिले में  तीनो ब्याधियों से बंचित युगपुरुष पत्रकार भी हों ....वैसे सज्जन महापुरुषों का नमन करते हुए निवेदन है की वो कृपया इसे दिल पर ना लें.....वैसे तो मदिरापान आम बात है ...आप पैसे कमाइए और खूब पीजिये पिलाइए ....रोज पार्टी कीजिये .......किसी के बाप का क्या ....आप मेहनत करते है, पैसे  कमाते हैं ...जीवन के आनंद के लिए ही तो सुरा और सुंदरी है .....आप भबिष्य और वर्तमान दोनों है इस वतन के ...आप का आनंद करना उतना ही जरुरी है जितना ..मोहन दा के सोना दुकान की जेबरों पर होल मार्क के निशान का होना....आप आनंद नहीं करेंगे ...उत्सव नहीं मनाएंगे तो कल मेह्नत कैसे करेंगे ....मेह्नत बंद तो देश की तरक्की बंद ,फिर कामचोर किसके भरोसे रहेंगे .....आप ठहरे काम वाले लोग ....lekin  sochiye जरा की वो लोग जो काम ही इस लिए करते है की कैसे देशी बोतल में...विदेशी अंगूर की बेटी पेट में जा कर, रग रग में लहू बनकर दौरे ...और पीने का बाद डी एम्, एसपि दोस्त और थानेदार सब चेला बता बता कर ....धौस पट्टी पढाया जाये....
जारी है ...........................